भूल जाओ हीरो को! ये हैं बॉलीवुड के 5 दमदार खलनायक जिन्हें आप कभी नहीं भूल पाएंगे! | 5 amazing villains of Bollywood who will always be remembered!
बॉलीवुड सिर्फ रोमांस और थिरकते गानों का ही नाम नहीं है! असली रोमांच शुरू होता है पर्दे के उन खलनायकों के साथ, जिन्होंने बचपन में हमें डराया, गुस्सा दिलाया और कभी-कभी हंसाया भी! याद है "कितने आदमी थे?" पूछने वाला गब्बर सिंह? या "मोगैम्बो खुश हुआ" का ऐलान करने वाला तानाशाह? पर्दे पर भले ही हीरो की जीत होती थी, मगर ये खलनायक हमारे दिलों में अपनी एक अलग जगह बना लेते थे. तो पेश है बॉलीवुड के ऐसे ही 5 खलनायकों की कहानी, जिन्होंने अपनी दमदार अदाकारी और यादगार किरदारों से हमें बांध कर रखा!जो सरासर आतंक से लेकर हास्यपूर्ण मूर्खता तक बुराई का एक अलग रूप लेकर आते हैं
- गब्बर सिंह (शोले, 1975) -
अमजद खान द्वारा अभिनीत, गब्बर सिंह यकीनन भारतीय सिनेमा का सबसे प्रतिष्ठित खलनायक है। उसकी बेरहमी जगजाहिर है, जो अपने डाकू गिरोह के साथ खौफ का साया छोड़ देता है। उनकी विशिष्ट संवाद अदायगी (विशेषकर "कितने आदमी थे?") और खतरनाक स्क्रीन उपस्थिति ने उन्हें एक ऐसा पात्र बना दिया जिसे दर्शक प्यार करने के साथ-साथ नफरत भी करते थे और डरते थे। गब्बर सिंह एक ऐसा किरदार है जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता। वह भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रतिष्ठित खलनायकों में से एक रहेगा।
- यादगार डायलॉग: गब्बर सिंह के डायलॉग बहुत ही यादगार थे। "कितने आदमी थे?" और "हमारी तो बन्दूक गोलियों से भी तेज़ चलती है" (Our guns are faster than bullets) और "अरे ओ सांबा..." (Hey O Samba...) जैसे डायलॉग आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।
- मोगैम्बो (मिस्टर इंडिया, 1987) -
मिस्टर इंडिया में अमरीश पुरी द्वारा सत्ता के भूखे मोगैम्बो का किरदार एक और अविस्मरणीय प्रदर्शन है। मोगैम्बो का स्टाइल बहुत ही अनोखा था। वह अजीबोगरीब कपड़े पहनता था और उसकी आवाज में गूंज थी। मोगैम्बो की हंसी बहुत ही डरावनी थी। यह दर्शकों को डराने और उन्हें असहज महसूस कराने के लिए पर्याप्त थी। उनका कैचफ्रेज "मोगैम्बो खुश हुआ" (मोगैम्बो खुश है) ने उन्हें एक पॉप-कल्चर घटना बना दिया। मोगैम्बो सिर्फ एक खलनायक नहीं था; वह अपनी खलनायकी में आनंद लेता था, जिसमें दिखावटीपन की एक परत जोड़ दी गई थी जिसने उसे भयानक और अजीब तरह से मनमोहक दोनों बना दिया।
- यादगार डायलॉग: मोगैम्बो के डायलॉग बहुत ही यादगार थे। "मोगैम्बो खुश हुआ" जैसे डायलॉग आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।
- कांचा चीना (अग्निपथ, 1990) -
डैनी डेन्जोंगपा द्वारा अभिनीत, कांचा चीना 1990 में आई फिल्म अग्निपथ का एक प्रतिष्ठित खलनायक चरित्र है। कांचा चीना एक निर्दयी अपराधी सरदार था जो विजय (अमिताभ बच्चन) के पिता की हत्या के लिए जिम्मेदार था।
कांचा चीना अपनी क्रूरता, निर्दयता, और लालच के लिए जाना जाता था। वह अपनी शक्ति और प्रभाव का इस्तेमाल लोगों को डराने और शोषण करने के लिए करता था।
डैनी डेन्जोंगपा ने कांचा चीना के किरदार को इतनी शानदार तरीके से निभाया कि दर्शक उनसे नफरत करने लगे, लेकिन साथ ही साथ उन्हें किरदार से प्यार भी हो गया।
- यादगार डायलॉग: कांचा चीना के डायलॉग बहुत ही यादगार थे। "हम तो वैसे भी बुरे हैं, और तुम लोग हमें और भी बुरे बना देते हो" जैसे डायलॉग आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।
- शकाल (शान, 1993) -
सुनील दत्त जी द्वारा अभिनीत, शकाल एक अन्य प्रतिष्ठित खलनायक है जो अपनी निर्दयता और सावधानीपूर्वक योजना के लिए जाना जाता है। उनकी विस्तृत योजनाएँ और खतरनाक रवैया, एक विशिष्ट आईपैच के साथ, उन्हें फिल्म के हीरो के लिए एक दुर्जेय प्रतिद्वंद्वी बना देता है। शकाल एक रंगीन खलनायक नहीं था; वह गणनाबद्ध बुराई का अवतार था, जो नायक के अधिक आवेगी व्यक्तित्व के विपरीत एक डरावना था।
- यादगार डायलॉग: शकाल के डायलॉग बहुत ही यादगार थे। "शतरंज का खेल है, और मैं खिलाड़ी हूं" (Chess is the game, and I am the player) जैसे डायलॉग आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।
- क्राइम मास्टर गो गो (आंदाज अपना अपना, 1994) -
खलनायक की भूमिका पर एक हास्यपूर्ण पैरोडी, Andaaz Apna Apna का क्राइम मास्टर गो गो खतरनाक होने से ज्यादा भोला है। शक्ति कपूर द्वारा अभिनीत, यह चरित्र अपनी अतिशयोक्तिपूर्ण योजनाओं, हास्यास्पद वेशभूषा और यादगार कैचफ्रेज के लिए जाना जाता है। गो गो की अयोग्यता पूरी फिल्म में हंसी प्रदान करती है, लेकिन वह अभी भी एक खतरा है, हमें याद दिलाता है कि खलनायक भी मूर्ख हो सकते हैं। क्राइम मास्टर गो गो साबित करता है कि खलनायकी हर रूप में आ सकती है, यहां तक कि हास्यास्पद रूप से अयोग्य भी।
- यादगार डायलॉग: गो गो के डायलॉग बहुत ही यादगार थे। "अब तू मर जाएगा!" (Now you will die!) जैसे डायलॉग आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।







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